Thursday, December 17, 2015

वृक्षों में जीव के सन्धर्भ में दिए जाने वाले तर्क की समीक्षा -

तर्क न १ - कुछ मासाहारी पौधे होते है | और मासाहार आदि ग्रहण करना सजीवो का लक्षण है इससे वृक्ष सजीव सिद्ध होते है ?
समीक्षा - अनेको प्रत्यक्ष दृष्टांत से देखा जाता है कि जो जो मासाहारी या निंद्रा लेता है उसकी उस उस पदार्थ में प्रीती होती है | जेसे कोई मॉस खाता है उसकी मॉस में प्रीति ,कोई नींद लेता है उसकी नींद में अर्थात सोने में | लेकिन क्या वृक्षों में भी प्रीति होती है | वृक्षों में प्रीति के सन्धर्भ में मह्रिषी दयानंद जी का निम्न कथन प्राप्त होता है - 
" वृक्ष: कृतस्म (उणादि कोष ३/६६ ) इस पर दयानंद जी लिखते है -" वृक्ष जाति प्रीति हीन होती है | जब वृक्षों में प्रीति नही है तो उनमे मॉस आदि की भी प्रीति नही होगी अर्थात जिन वृक्षों में कीड़े आदि मरते है वो उन वृक्षों की रसायनिक या भौतिकी क्रिया के परिणाम स्वरूप है जेसे अग्नि में जाते ही पतंगे का मरना | न की किसी चेतन तत्व द्वारा | अगर चेतन द्वारा होती तो जेसे अन्य प्राणियों में प्रीति होती है वेसे ही वृक्षों में भी होती |

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