वृक्षों में जीव बताने वाले लोगो के पास सबसे प्रबल प्रमाण जगदीश चन्द्रबोस और उनका केस्मोग्राफ यंत्र है | हालकी यह यंत्र शायद ही किसी ने देखा हो फिउर भी पढ़ा सभी ने है | लेकिन जगदीशचन्द्र बोस आर्य समाज के सत्यव्रतसिद्धां तलन्कार जी के मित्र थे जो भारत सरकार में केबिनेट में भी रहे थे एक बार इनसे जगदीश चन्द्र बोस मिले उनसे इन्होने पूछा कि आपने हमे संकट में डाल दिया कि वृक्षों में जीव होता तो लोग मासाहार शाकाहार दोनों नही कर सकते है | इसी बात पर बोस ने उनसे कहा कि वृक्षों में आत्मा नही होता है | ( यह वर्णन मैंने अपने शब्दों में लिखा है यह पूरा वर्णन सत्यव्रतसिद्धां तलन्कार जी की पुस्तक वैदिक विचारधारा का वैज्ञानिक आधार ) में है | एक बार जगदीश चन्द्रबोस को उनकी वृक्ष सम्बन्धी मान्यताओं जिसमे उन्होंने वृक्षों में सम्वेदना आदि बताई थी पर बम्बई के एक पारसी प्रोफेसर दस्तूर ने शास्त्रार्थ की चुनोती दी थी | लेकिन बोस ने यह कह कर टाल दिया कि मै युवाओं से शास्त्रार्थ नही करता हु मेरी ख्याति विश्वप्रसिद्ध है | इससे पता चलता है कि अपने दिए कई नियमो से बहस करने से बोस डरते थे और वृक्षों में आत्मा भी नही मानते थे |
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